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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 66

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राखिअ अवध जो अवधि लगि रहत न जनिअहिं प्रान। दीनबंधु सुंदर सुखद सील सनेह निधान॥66॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे दीनबन्धु! हे सुंदर! हे सुख देने वाले! हे शील और प्रेम के भंडार! यदि अवधि (चौदह वर्ष) तक मुझे अयोध्या में रखते हैं, तो जान लीजिए कि मेरे प्राण नहीं रहेंगे॥66॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 66 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik