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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 82

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ। गयउ जहाँ बाहेर नगर सीय सहित दोउ भाइ॥82॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सुमंत्रजी राजा की आज्ञा पाकर, सिर नवाकर और बहुत जल्दी रथ जुड़वाकर वहाँ गए, जहाँ नगर के बाहर सीताजी सहित दोनों भाई थे॥82॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 82 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik