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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 85

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राम लखन सिय जान चढ़ि संभु चरन सिरु नाइ। सचिवँ चलायउ तुरत रथु इत उत खोज दुराइ॥85॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

शंकरजी के चरणों में सिर नवाकर श्री रामजी, लक्ष्मणजी और सीताजी रथ पर सवार हुए। मंत्री ने तुरंत ही रथ को इधर-उधर खोज छिपाकर चला दिया॥85॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 85 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik