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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 86

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि। मनहुँ कोक कोकी कमल दीन बिहीन तमारि॥86॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(सब) स्त्री-पुरुष श्री रामचन्द्रजी के दर्शन के लिए नियम और व्रत करने लगे और ऐसे दुःखी हो गए जैसे चकवा, चकवी और कमल सूर्य के बिना दीन हो जाते हैं॥86॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 86 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik