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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 93

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भगत भूमि भूसुर सुरभि सुर हित लागि कृपाल। करत चरित धरि मनुज तनु सुनत मिटहिं जग जाल॥93॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वही कृपालु श्री रामचन्द्रजी भक्त, भूमि, ब्राह्मण, गो और देवताओं के हित के लिए मनुष्य शरीर धारण करके लीलाएँ करते हैं, जिनके सुनने से जगत के जंजाल मिट जाते हैं॥93॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 93 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik