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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 95

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

पितु पद गहि कहि कोटि नति बिनय करब कर जोरि। चिंता कवनिहु बात कै तात करिअ जनि मोरि॥95॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आप जाकर पिताजी के चरण पकड़कर करोड़ों नमस्कार के साथ ही हाथ जोड़कर बिनती करिएगा कि हे तात! आप मेरी किसी बात की चिन्ता न करें॥95॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 95 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik