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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 96

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मइकें ससुरें सकल सुख जबहिं जहाँ मनु मान। तहँ तब रहिहि सुखेन सिय जब लगि बिपति बिहान॥96॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सीता के मायके (पिता के घर) और ससुराल में सब सुख हैं। जब तक यह विपत्ति दूर नहीं होती, तब तक वे जब जहाँ जी चाहें, वहीं सुख से रहेंगी॥96॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 96 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik