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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 14

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

हरित भूमि तृन संकुल समुझि परहिं नहिं पंथ। जिमि पाखंड बाद तें गुप्त होहिं सदग्रंथ॥14॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरी हो गई है, जिससे रास्ते समझ नहीं पड़ते। जैसे पाखंड मत के प्रचार से सद्ग्रंथ गुप्त (लुप्त) हो जाते हैं॥14॥

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