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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 16

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

चले हरषि तजि नगर नृप तापस बनिक भिखारि। जिमि हरिभगति पाइ श्रम तजहिं आश्रमी चारि॥16॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(शरद् ऋतु पाकर) राजा, तपस्वी, व्यापारी और भिखारी (क्रमशः विजय, तप, व्यापार और भिक्षा के लिए) हर्षित होकर नगर छोड़कर चले। जैसे श्री हरि की भक्ति पाकर चारों आश्रम वाले (नाना प्रकार के साधन रूपी) श्रमों को त्याग देते हैं॥16॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 16 किष्किन्धा काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik