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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 17

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

भूमि जीव संकुल रहे गए सरद रितु पाइ। सदगुर मिलें जाहिं जिमि संसय भ्रम समुदाइ॥17॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(वर्षा ऋतु के कारण) पृथ्वी पर जो जीव भर गए थे, वे शरद् ऋतु को पाकर वैसे ही नष्ट हो गए जैसे सद्गुरु के मिल जाने पर संदेह और भ्रम के समूह नष्ट हो जाते हैं॥17॥

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