ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 23

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

चले सकल बन खोजत सरिता सर गिरि खोह। राम काज लयलीन मन बिसरा तन कर छोह॥23॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सब वानर वन, नदी, तालाब, पर्वत और पर्वतों की कन्दराओं में खोजते हुए चले जा रहे हैं। मन श्री रामजी के कार्य में लवलीन है। शरीर तक का प्रेम (ममत्व) भूल गया है॥23॥

आगे पढ़ें — किष्किन्धा काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 23 किष्किन्धा काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik