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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 24

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

दीख जाइ उपबन बर सर बिगसित बहु कंज। मंदिर एक रुचिर तहँ बैठि नारि तप पुंज॥24॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अंदर जाकर उन्होंने एक उत्तम उपवन (बगीचा) और तालाब देखा, जिसमें बहुत से कमल खिले हुए हैं। वहीं एक सुंदर मंदिर है, जिसमें एक तपोमूर्ति स्त्री बैठी है॥24॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 24 किष्किन्धा काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik