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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

किष्किन्धा काण्ड दोहा 27

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

मोहि लै जाहु सिंधुतट देउँ तिलांजलि ताहि। बचन सहाइ करबि मैं पैहहु खोजहु जाहि॥27॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(उसने कहा-) मुझे समुद्र के किनारे ले चलो, मैं जटायु को तिलांजलि दे दूँ। इस सेवा के बदले मैं तुम्हारी वचन से सहायता करूँगा (अर्थात्‌ सीताजी कहाँ हैं सो बतला दूँगा), जिसे तुम खोज रहे हो उसे पा जाओगे॥27॥

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