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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 28

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

मैं देखउँ तुम्ह नाहीं गीधहि दृष्टि अपार। बूढ़ भयउँ न त करतेउँ कछुक सहाय तुम्हार॥28॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैं उन्हें देख रहा हूँ, तुम नहीं देख सकते, क्योंकि गीध की दृष्टि अपार होती है (बहुत दूर तक जाती है)। क्या करूँ? मैं बूढ़ा हो गया, नहीं तो तुम्हारी कुछ तो सहायता अवश्य करता॥28॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 28 किष्किन्धा काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik