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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 29

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

बलि बाँधत प्रभु बाढ़ेउ सो तनु बरनि न जाइ। उभय घरी महँ दीन्हीं सात प्रदच्छिन धाइ॥29॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बलि के बाँधते समय प्रभु इतने बढ़े कि उस शरीर का वर्णन नहीं हो सकता, किंतु मैंने दो ही घड़ी में दौड़कर (उस शरीर की) सात प्रदक्षिणाएँ कर लीं॥29॥

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