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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

किष्किन्धा काण्ड दोहा 2

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

एकु मैं मंद मोहबस कुटिल हृदय अग्यान। पुनि प्रभु मोहि बिसारेउ दीनबंधु भगवान॥2॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

एक तो मैं यों ही मंद हूँ, दूसरे मोह के वश में हूँ, तीसरे हृदय का कुटिल और अज्ञान हूँ, फिर हे दीनबंधु भगवान्‌! प्रभु (आप) ने भी मुझे भुला दिया!॥2॥

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