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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

किष्किन्धा काण्ड दोहा 5

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

सखा बचन सुनि हरषे कृपासिंधु बलसींव। कारन कवन बसहु बन मोहि कहहु सुग्रीव॥5॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कृपा के समुद्र और बल की सीमा श्री रामजी सखा सुग्रीव के वचन सुनकर हर्षित हुए। (और बोले-) हे सुग्रीव! मुझे बताओ, तुम वन में किस कारण रहते हो?॥5॥

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