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श्रीरामचरितमानस · किष्किन्धा काण्ड

दोहा 9

किष्किन्धा काण्ड · Kishkindha Kaand

मूल पाठ

सुनहु राम स्वामी सन चल न चातुरी मोरि। प्रभु अजहूँ मैं पापी अंतकाल गति तोरि॥9॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(बालि ने कहा-) हे श्री रामजी! सुनिए, स्वामी (आप) से मेरी चतुराई नहीं चल सकती। हे प्रभो! अंतकाल में आपकी गति (शरण) पाकर मैं अब भी पापी ही रहा?॥9॥

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