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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

चौपाई 3

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

सुनत बचन पद गहि समुझाएसि। प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि॥ निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी। अस कहि सो निज भवन सिधारी।3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सीताजी के वचन सुनकर त्रिजटा ने चरण पकड़कर उन्हें समझाया और प्रभु का प्रताप, बल और सुयश सुनाया। (उसने कहा-) हे सुकुमारी! सुनो रात्रि के समय आग नहीं मिलेगी। ऐसा कहकर वह अपने घर चली गई॥3॥

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 3 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik