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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 18

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि। कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि॥18॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उन्होंने सेना में से कुछ को मार डाला और कुछ को मसल डाला और कुछ को पकड़-पकड़कर धूल में मिला दिया। कुछ ने फिर जाकर पुकार की कि हे प्रभु! बंदर बहुत ही बलवान्‌ है॥18॥

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