ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 19

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार। जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥19॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अंत में उसने ब्रह्मास्त्र का संधान (प्रयोग) किया, तब हनुमान्‌जी ने मन में विचार किया कि यदि ब्रह्मास्त्र को नहीं मानता हूँ तो उसकी अपार महिमा मिट जाएगी॥19॥

आगे पढ़ें — सुन्दर काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 19 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik