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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 1

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥1॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हनुमान्‌जी ने उसे हाथ से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा- भाई! श्री रामचंद्रजी का काम किए बिना मुझे विश्राम कहाँ?॥1॥

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