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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 25

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास। अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास॥25॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस समय भगवान्‌ की प्रेरणा से उनचासों पवन चलने लगे। हनुमान्‌जी अट्टहास करके गर्जे और बढ़कर आकाश से जा लगे॥25॥

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