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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 26

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि। जनकसुता कें आगें ठाढ़ भयउ कर जोरि॥26॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

पूँछ बुझाकर, थकावट दूर करके और फिर छोटा सा रूप धारण कर हनुमान्‌जी श्री जानकीजी के सामने हाथ जोड़कर जा खड़े हुए॥26॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 26 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik