ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 27

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

जनकसुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह। चरन कमल सिरु नाइ कपि गवनु राम पहिं कीन्ह॥27॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हनुमान्‌जी ने जानकीजी को समझाकर बहुत प्रकार से धीरज दिया और उनके चरणकमलों में सिर नवाकर श्री रामजी के पास गमन किया॥27॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 27 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik