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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 30

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट॥30॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(हनुमान्‌जी ने कहा-) आपका नाम रात-दिन पहरा देने वाला है, आपका ध्यान ही किंवाड़ है। नेत्रों को अपने चरणों में लगाए रहती हैं, यही ताला लगा है, फिर प्राण जाएँ तो किस मार्ग से?॥30॥

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