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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 31

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

निमिष निमिष करुनानिधि जाहिं कलप सम बीति। बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति॥31॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे करुणानिधान! उनका एक-एक पल कल्प के समान बीतता है। अतः हे प्रभु! तुरंत चलिए और अपनी भुजाओं के बल से दुष्टों के दल को जीतकर सीताजी को ले आइए॥31॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 31 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik