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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

दोहा 3

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार। अति लघु रूप धरों निसि नगर करौं पइसार॥3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नगर के बहुसंख्यक रखवालों को देखकर हनुमान्‌जी ने मन में विचार किया कि अत्यंत छोटा रूप धरूँ और रात के समय नगर में प्रवेश करूँ॥3॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 3 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik