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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 126

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

मुनि दुर्लभ हरि भगति नर पावहिं बिनहिं प्रयास। जे यह कथा निरंतर सुनहिं मानि बिस्वास॥126॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

किंतु जो मनुष्य विश्वास मानकर यह कथा निरंतर सुनते हैं, वे बिना ही परिश्रम उस मुनि दुर्लभ हरि भक्ति को प्राप्त कर लेते हैं॥126॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 126 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik