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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 129

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

मैं कृतकृत्य भइउँ अब तव प्रसाद बिस्वेस। उपजी राम भगति दृढ़ बीते सकल कलेस॥129॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे विश्वनाथ! आपकी कृपा से अब मैं कृतार्थ हो गई। मुझमें दृढ़ राम भक्ति उत्पन्न हो गई और मेरे संपूर्ण क्लेश बीत गए (नष्ट हो गए)॥129॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 129 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik