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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 20

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग। चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग॥20॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सब लोग अपने-अपने वर्ण और आश्रम के अनुकूल धर्म में तत्पर हुए सदा वेद मार्ग पर चलते हैं और सुख पाते हैं। उन्हें न किसी बात का भय है, न शोक है और न कोई रोग ही सताता है॥20॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 20 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik