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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 25

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार। सोइ सच्चिदानंद घन कर नर चरित उदार॥25॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो (बौद्धिक) ज्ञान, वाणी और इंद्रियों से परे और अजन्मा है तथा माया, मन और गुणों के परे है, वही सच्चिदानन्दघन भगवान्‌ श्रेष्ठ नरलीला करते हैं॥25॥

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