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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 26

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

अवधपुरी बासिन्ह कर सुख संपदा समाज। सहस सेष नहिं कहि सकहिं जहँ नृप राम बिराज॥26॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जहाँ भगवान्‌ श्री रामचंद्रजी स्वयं राजा होकर विराजमान हैं, उस अवधपुरी के निवासियों के सुख-संपत्ति के समुदाय का वर्णन हजारों शेषजी भी नहीं कर सकते॥26॥

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