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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 28

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर। बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर॥28॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नगर के उत्तर दिशा में सरयूजी बह रही हैं, जिनका जल निर्मल और गहरा है। मनोहर घाट बँधे हुए हैं, किनारे पर जरा भी कीचड़ नहीं है॥28॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 28 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik