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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 29

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

रमानाथ जहँ राजा सो पुर बरनि कि जाइ। अनिमादिक सुख संपदा रहीं अवध सब छाइ॥29॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

स्वयं लक्ष्मीपति भगवान्‌ जहाँ राजा हों, उस नगर का कहीं वर्णन किया जा सकता है? अणिमा आदि आठों सिद्धियाँ और समस्त सुख-संपत्तियाँ अयोध्या में छा रही हैं॥29॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 29 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik