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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 31

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

यह प्रताप रबि जाकें उर जब करइ प्रकास। पछिले बाढ़हिं प्रथम जे कहे ते पावहिं नास॥31॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यह श्री रामप्रताप रूपी सूर्य जिसके हृदय में जब प्रकाश करता है, तब जिनका वर्णन पीछे से किया गया है, वे (धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सुख, संतोष, वैराग्य और विवेक) बढ़ जाते हैं और जिनका वर्णन पहले किया गया है, वे (अविद्या, पाप, काम, क्रोध, कर्म, काल, गुण, स्वभाव आदि) नाश को प्राप्त होते (नष्ट हो जाते) हैं॥31॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 31 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik