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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 33

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

संत संग अपबर्ग कर कामी भव कर पंथ। कहहिं संत कबि कोबिद श्रुति पुरान सदग्रंथ॥33॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

संत का संग मोक्ष (भव बंधन से छूटने) का और कामी का संग जन्म-मृत्यु के बंधन में पड़ने का मार्ग है। संत, कवि और पंडित तथा वेद, पुराण (आदि) सभी सद्ग्रंथ ऐसा कहते हैं॥33॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 33 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik