ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 34

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

परमानंद कृपायतन मन परिपूरन काम। प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्रीराम॥34॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आप परमानंद स्वरूप, कृपा के धाम और मन की कामनाओं को परिपूर्ण करने वाले हैं। हे श्री रामजी! हमको अपनी अविचल प्रेमाभक्ति दीजिए॥34॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 34 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik