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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 36

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

नाथ न मोहि संदेह कछु सपनेहुँ सोक न मोह। केवल कृपा तुम्हारिहि कृपानंद संदोह॥36॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे नाथ! न तो मुझे कुछ संदेह है और न स्वप्न में भी शोक और मोह है। हे कृपा और आनंद के समूह! यह केवल आपकी ही कृपा का फल है॥36॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 36 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik