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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 37

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड। अनल दाहि पीटत घनहिं परसु बदन यह दंड॥37॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इसी गुण के कारण चंदन देवताओं के सिरों पर चढ़ता है और जगत्‌ का प्रिय हो रहा है और कुल्हाड़ी के मुख को यह दंड मिलता है कि उसको आग में जलाकर फिर घन से पीटते हैं॥37॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 37 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik