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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 38

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज। ते सज्जन मम प्रानप्रिय गुन मंदिर सुख पुंज॥38॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिन्हें निंदा और स्तुति (बड़ाई) दोनों समान हैं और मेरे चरणकमलों में जिनकी ममता है, वे गुणों के धाम और सुख की राशि संतजन मुझे प्राणों के समान प्रिय हैं॥38॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 38 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik