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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 3

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

दधि दुर्बा रोचन फल फूला। नव तुलसी दल मंगल मूला॥ भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधुरगामिनी॥3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(श्री रामजी के स्वागत के लिए) दही, दूब, गोरोचन, फल, फूल और मंगल के मूल नवीन तुलसीदल आदि वस्तुएँ सोने की थाली में भर-भरकर हथिनी की सी चाल वाली सौभाग्यवती स्त्रियाँ (उन्हें लेकर) गाती हुई चलीं॥3॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 3 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik