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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 3

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

रिपु रन जीति सुजस सुर गावत। सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥ सुनत बचन बिसरे सब दूखा। तृषावंत जिमि पाइ पियूषा॥3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

शत्रु को रण में जीतकर सीताजी और लक्ष्मणजी सहित प्रभु आ रहे हैं, देवता उनका सुंदर यश गा रहे हैं। ये वचन सुनते ही (भरतजी को) सारे दुःख भूल गए। जैसे प्यासा आदमी अमृत पाकर प्यास के दुःख को भूल जाए॥3॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 3 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik