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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 41

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

सुनहु तात माया कृत गुन अरु दोष अनेक। गुन यह उभय न देखिअहिं देखिअ सो अबिबेक॥41॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे तात! सुनो, माया से रचे हुए ही अनेक (सब) गुण और दोष हैं (इनकी कोई वास्तविक सत्ता नहीं है)। गुण (विवेक) इसी में है कि दोनों ही न देखे जाएँ, इन्हें देखना ही अविवेक है॥41॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 41 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik