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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 42

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

जीवनमुक्त ब्रह्मपर चरित सुनहिं तजि ध्यान। जे हरि कथाँ न करहिं रति तिन्ह के हिय पाषान॥42॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सनकादि मुनि जैसे जीवन्मुक्त और ब्रह्मनिष्ठ पुरुष भी ध्यान (ब्रह्म समाधि) छोड़कर श्री रामजी के चरित्र सुनते हैं। यह जानकर भी जो श्री हरि की कथा से प्रेम नहीं करते, उनके हृदय (सचमुच ही) पत्थर (के समान) हैं॥42॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 42 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik