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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 49

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

नाथ एक बर मागउँ राम कृपा करि देहु। जन्म जन्म प्रभु पद कमल कबहुँ घटै जनि नेहु॥49॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जहे नाथ! हे श्री रामजी! मैं आपसे एक वर माँगता हूँ, कृपा करके दीजिए। प्रभु (आप) के चरणकमलों में मेरा प्रेम जन्म-जन्मांतर में भी कभी न घटे॥49॥

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