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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 4

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

जे जैसेहिं तैसेहिं उठि धावहिं। बाल बृद्ध कहँ संग न लावहिं॥ एक एकन्ह कहँ बूझहिं भाई। तुम्ह देखे दयाल रघुराई॥4॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो जैसे हैं (जहाँ जिस दशा में हैं) वे वैसे ही (वहीं से उसी दशा में) उठ दौड़ते हैं। (देर हो जाने के डर से) बालकों और बूढ़ों को कोई साथ नहीं लाते। एक-दूसरे से पूछते हैं- भाई! तुमने दयालु श्री रघुनाथजी को देखा है?॥4॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 4 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik