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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 4

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

को तुम्ह तात कहाँ ते आए। मोहि परम प्रिय बचन सुनाए॥ मारुत सुत मैं कपि हनुमाना। नामु मोर सुनु कृपानिधाना॥4॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(भरतजी ने पूछा-) हे तात! तुम कौन हो? और कहाँ से आए हो? (जो) तुमने मुझको (ये) परम प्रिय (अत्यंत आनंद देने वाले) वचन सुनाए। (हनुमान्‌जी ने कहा) हे कृपानिधान! सुनिए, मैं पवन का पुत्र और जाति का वानर हूँ, मेरा नाम हनुमान्‌ है॥4॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 4 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik