ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 51

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

प्रेम सहित मुनि नारद बरनि राम गुन ग्राम। सोभासिंधु हृदयँ धरि गए जहाँ बिधि धाम॥51॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचंद्रजी के गुणसमूहों का प्रेमपूवक वर्णन करके मुनि नारदजी शोभा के समुद्र प्रभु को हृदय में धरकर जहाँ ब्रह्मलोक है, वहाँ चले गए॥51॥

आगे पढ़ें — उत्तर काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 51 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik