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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 55

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

ऐसिअ प्रस्न बिहंगपति कीन्हि काग सन जाइ। सो सब सादर कहिहउँ सुनहु उमा मन लाई॥55॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

पक्षीराज गरुड़जी ने भी जाकर काकभुशुण्डिजी से प्रायः ऐसे ही प्रश्न किए थे। हे उमा! मैं वह सब आदरसहित कहूँगा, तुम मन लगाकर सुनो॥55॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 55 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik